Ballia News : फौजी दीपक यादव की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, 8 माह के बेटे ने दी मुखाग्नि, गांव में पसरा मातम

Ballia News: बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र के दलछपरा गांव में तैनात फौजी दीपक यादव का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर शाम जैसे ही पहुंचा, गांव में कोहराम मच गया। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ ने ‘दीपक यादव को न्याय दो’ के नारों के साथ शव को दरवाजे पर रखकर धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों और परिजनों की मांग थी कि दीपक की मौत की उच्चस्तरीय जांच हो और जब तक जिलाधिकारी या मुख्यमंत्री स्तर से आश्वासन नहीं मिलेगा, अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

परिजनों ने आरोप लगाया कि दीपक की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या है। भारी विरोध और धरने के बाद जिलाधिकारी के आश्वासन पर परिजन अंततः अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। शनिवार सुबह गंगापुर (पचरूखिया) घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान दीपक के केवल 8 महीने के बेटे दिव्यांश ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।

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संदिग्ध हालात में हुई थी मौत

दीपक यादव पिछले 10 वर्षों से सेना की मेडिकल कोर में कार्यरत थे और वर्तमान में राजस्थान के सूरतगढ़ में तैनात थे। परिजनों के अनुसार, 1 अप्रैल की रात दीपक की पत्नी दिव्या उर्फ गोल्डी से उनकी आखिरी बार बातचीत हुई थी। उसी रात सेना के एक अधिकारी ने पत्नी से उनके देवर का नंबर मांगा और फिर सुबह उनके मौत की खबर मिली।

दीपक की पत्नी ने यूनिट के तीन जवानों पर हत्या का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि "मेरे पति की हत्या कर मेरे पूरे परिवार को उजाड़ दिया गया है। उन्हें शहीद का दर्जा मिले और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।"

परिजनों ने शव लेने से किया था इनकार

जवान का शव जब गांव पहुंचा, तो परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया। परिजन मौके पर धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर सीओ बैरिया मोहम्मद फहीम कुरैशी और बाद में एसडीएम बैरिया मौके पर पहुंचे। मृतक की पत्नी की जिलाधिकारी से बात कराई गई, तब जाकर परिजन अंतिम संस्कार को राजी हुए।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

शनिवार सुबह निकली अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, दीपक तेरा नाम रहेगा’ जैसे नारों के साथ गांव से गंगा घाट तक की सड़कें लोगों से भरी रहीं। रास्ते भर लोगों ने तिरंगा लहराकर और पुष्प अर्पित कर अपने फौजी बेटे को विदाई दी।

गांव के लाल दीपक यादव की असामयिक और संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दीपक को न्याय और शहीद का दर्जा मिलेगा।

Edited By: Parakh Khabar

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